आदिवासी कौन है? आदिवासी दिवस कब मनाया जाता है?


आदिवासी कौन है? - Who is Aadivasi?

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नमस्कार दोस्तों आज हम इस लेख में आदिवासी(Aadivasi) लोगो के बारेमें बात करेंगे। ऐसे बहोंत सारे लोग हे जो नहीं जानते की आखिर ये आदिवासी है कौन?-Who is Aadivasi? तो दोस्तों आज हम इस लेख में आदिवासी लोगो के बारेमें विस्तार से चर्चा करेंगे तो अंत तक जरूर पढ़े।

कई सारे लोग ऐसा मानते हे की आदिवासी(Aadivasi)लोग मतलब अनपढ़ और गंवार लोग जो जंगल अर्धनग्न हालत में रहते है। लोगों मे आदिवासी प्रत्ये ऐसी छबि का कारण सिर्फ और सिर्फ टेलीविजन फिल्म हे क्योंकि आदिवासी लोगो को इसी रूप में फिल्माया जाता है।

लेकिन दोस्तों आपको बता दू की आदिवासी(Aadivasi) शब्द अपने आप में एक गौरवशाली शब्द है। आदिवासी ऐसे लोग होते हे जिसने अपनी पांरपरिक संस्कृति को बचाए रखा है। और हंमेशा स्वतंत्रता प्रिय और स्वाभिमानी रहे है। जिन्होंने देश में संस्कृति के बीज बोयें। ये वही आदिवासी हे जिसने भारत की स्वतंत्रता का बीज बोया था। आज हम उसी आदिवासी के बारेमें जानेंगे।

आज हम इस लेख मे आदिवासी कौन है, आदिवासी दिवस(Aadivasi divas) कब मनाया जाता है, प्रमुख आदिवासी के जनसमूह, आदिवासी भाषा, आदिवासी परंपरा और संस्कृति, प्रमुख आदिवासी व्यक्ति आदि के बारेमें जानेंगे।


    आदिवासी कौन है? -Aadivasi History


    दोस्तों आदिवासी शब्द दो शब्द को मिलकर बना हे एक 'आदि' और दूसरा 'वासी' जिसका मतलब 'पुरानेनिवासी' या 'मूलनिवासी' होता है। देखा जाये तो भारत की कुल जनसँख्या का 8.6 प्रतिशत करीब 10 करोड़ लोग आदिवासी है। ये आदिवासी लोग प्रकृति को ही भगवान मानते है और प्रकृति की पुंजा करते है। आदिवासी प्रकृति में पाए जानेवाले जीवजंतु, पर्वत, नदिया, जंगल, नहर और खेतो की पुंजा करते है और प्रकृति को अपनी माँ मानते है। आदिवासी प्रकृति से इतनी ही चीज लेते हे जितनी उन्हें जरुरत होती है आदिवासी(Aadivasi)को जनजाति भी कहते है।

    प्रमुख आदिवासी जनसमूह


    भारत में करीब करीब 461 जनजातियाँ पायी जाती है जिनकी कई उपजातियाँ भी होती है। हालांकि हम यहाँ अधिक जनसँख्या वाली जनजातियों के बारेमें बात करेंगे।

    1. गोंड जनजाति

    गोंड भारत की सबसे बड़ी जनसमूह वाली जनजाति है। ये जनजाति पांचवी शताब्दी में गोदावरी के तट से होकर मध्य भारत के पहाड़ी क्षेत्र में फैल गयी। गोंड जनजाति गोंडी भाषा बोलते है जो की तेलगु, कन्नड़, तमिल आदि से सम्बंधित है। गोंड जनजाति जनसँख्या के मामले मे प्रथम स्थान पर है जिनकी संख्या 4 करोड़ है।

    पन्दरहवी से सत्तरवीं सताब्दी के बिच गोंडवाना मे अनेक राजगोंड राजवंशिओ का सफल शासन स्थापित था। गोंडो का अपना एक प्रदेश था जिसे गोंडवाना कहा जाता था। गोंड आदिवासी की संस्कृति बेहद निराली है गोंड आदिवासी को अपनी संस्कृति और रीतिरिवाज पर गर्व है। गोंड जनजाति के प्रमुख व्यक्ति में रानी दुर्गावती जिन्होंने अकबर के खिलाफ युद्ध किया, गोंडवाना के राजा शंकरशाह जिन्होंने अंग्रेजो का विरोध किया था। जब गोंडवाना के राजा शंकरशाह और उनके बेटे ने अंग्रेजो का विरोध किया तो दोनों को टॉप के मुँह बांध के उड़ा दिया।

    2. भील जनजाति

    भील जनजाति का इतिहास बेहद ही गौरवशाली रहा है। भील जनजाति के पास अपनी संस्कृति रीतिरिवाज परंपरा और भाषा है। ये जनजाति स्वतंत्रता प्रिय रही है इन्होने कभी भी बाहरी सत्ता की गुलामी नहीं करी। भील जनजाति भगवान शिव की आराधना करती है साथ ही साथ भील जनजाति प्रकृति पुंजक भी रही है। भीलो की आबादी मध्यप्रदेश में सर्वाधिक है इसके आलावा गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में है। भीलो का इतिहास सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ा है एक समय ये जनजाति मिश्र से लेकर श्रीलंका तक फैली थी और इन्होने पाकिस्तान, भारत का हिमालय क्षेत्र, नेपाल, बंगाल और श्रीलंका में शासन स्थापित किया भीलो ने विश्वप्रसिद्ध गवरी, राई, घुम्मर, पिथोरा पेन्टिंग और भैरव गढ़ की विश्वप्रसिद्ध साड़ियों का विकास किया है। भील युद्ध के मैदान में बहोत ही चतुर थे भीलो ने हल्दीघाटी युद्ध, खानवा का युद्ध, अरबो के खिलाफ, मुगलो के खिलाफ, मराठो के खिलाफ और ब्रिटिशो के खिलाफ कई युद्ध लड़े और जित के झंडे भी लहराए।

    भीलो के प्रमुख व्यक्तिओ में राणा कुंभा, एकलव्य शबरी, वाल्मीकि, बिम्बिसारा, चन्द्रगुप्त कोठिया भील, गोविन्द गुरु, मोतीलाल तेजावत, सरदार हेमसिंह भील, काली बाई भील, सरदार हिरा भील प्रमुख रहें।

    3. अहोम जनजाति

    अहोम जनजाति मौजूदा म्यानमार से आकर तेरहवी सदी में ब्रह्मपुत्र घाटी में आ बसे। उन्होंने भूया भूस्वामी लोगो की राजनीती व्यवस्था का दमन करके नए राज्य की स्थापना की। अहोमो ने एक बड़ा राज्य बनाया। उन्होंने 1530 के दसक में ही अग्नि अस्त्रों का इस्तेमाल किया और 1660 तक आते आते वे उच्चतरीय बारूद और तोपों का निर्माण करने में सक्षम हो गए थे।

    4. संथाल जनजाति

    संथाल अपने आप में एक स्वतंत्र जनजाति है। यह जनजाति के लोग संथाली भाषा बोलते है। हिन्दू धर्म और अन्य धर्मो में जहा महिलाओ को विशेष सन्मान नहीं दिया जाता वही संथाल जनजाति एक ऐसी जनजाति हे जिसमे चाहे लड़के का जन्म हुआ हो या लड़की का जन्म दोनों को सन्मान की नज़रो से देखा जाता है। संथाल जनजाति के सभी लोगो को स्वतंत्रता होती है सभी लोग पढ़ लिख सकते है। इस जनजाति में महिलाओ को विशेष सन्मान दिया जाता हे उन्हें सतीप्रथा, पड़दाप्रथा, दहेजप्रथा जैसे चंगुल से आजादी मिली है। सभी लोग शिक्षा ग्रहण कर सकते है वो इच्छित रूप से सजधज सकते है वो नौकरी, मेहनत मजदूरी इच्छित कार्य कर सकते है। वो संथाली ही थे जिसने भारत की आजादी का बीज बोया था। संथालो ने 1855 मे अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह किया और साथ ही कई अन्य आदिवासी जनजातिओ ने भी सन 1857 के पहले ही अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह का झंडा गाड़ दिया था।

    प्रमुख आदिवासी व्यक्ति


    1. तात्या भील

    तात्या भील मध्य प्रदेश के खंडवा के रहनेवाले थे। जब मराठा लोग अंग्रेजो से हार गए तब भील जनजाति के प्रमुख तात्या भील ने अंग्रेजो के खिलाफ कई विद्रोह किए। इस वजह से उन्हें इंडियन रॉबिनहुड कहा जाता है। उन्होंने मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के भील और अन्य जाती के लोगो को एकजुट करके अंग्रेजो के खिलाफ आंदोलन किया था।

    2. बिरसा मुंडा

    बिरसा मुंडा ने बेहद ही कम उम्र में ब्रिटिशो का विरोध किया था और उन्होंने लोगो को 'हमारा देश हमारा राज' के नारे दिए। बिरसा मुंडा को झारखंड, बिहार, ओड़िसा, छत्तीसगढ़ और पच्छिम बंगाल में भगवान की तरह पुंजा जाते है।

    3. मोतीलाल तेजावत

    मोतीलाल तेजावत भूमंड के भील विद्रोह के प्रमुख नेता थे। उन्होंने भील राज्य के भीलो को एकजुट करके अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह किया। मानगढ़ आंदोलन मे गोविन्द गुरु और मोतीलाल तेजावत की आगेवानी में आंदोलन हुआ जिसमे 1500 से भी ज्यादा भील मारे गए थे।

    4. कुंवर नारायण सिंह

    कुंवर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ के एक बडे जमीनदार थे। उन्होंने अंग्रेजो के अत्याचारों के खिलाफ आंदोलन कीया तो अंग्रेजो ने भील कुंवर नारायण सिंह को बिच चोराये पर लटका के मोत दे दीं। चील, कौवे उसके शरीर को नोच नोच के खा गए।

    5. गुंडा धुर

    गुंडा धुर आजादी की जंग में छत्तीसगढ़ के ऐसे महानायक थे जिसके नाम से ही अंग्रेजो की रूह कांप जाती थी। उन्होंने अपने देश को अंग्रेजो के चंगुल से छुड़ाने के लिए सबकुछ कुर्बान कर दिया था।

    6. तिलक मांझी

    तिलक मांझी ने ब्रिटिशो के खिलाफ पहली लड़ाई लड़ी थी। तिलक मांझी एक लोकप्रिय संथाल थे। अंग्रेजो की नीतियों के खिलाफ सबसे पहली लड़ाई तिलक मांझी ने लड़ी थी।

    आदिवासी दिवस(Aadivasi divas) किस दिन मनाया जाता है?- International Tribal Day


    प्रतिवर्ष 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस(Aadivasi divas) के रूप में मनाया जाता है। इस दिन आदिवासी संगठन और सरकारी संस्थाओ के द्वारा सामूहिक समारोह का आयोजन किया जाता है। 1982 की संयुक्त राष्ट्र ने आदिवासी(Aadivasi) लोगों की समस्या के निराकरण के लिए एक बैठक की और एक कार्यदल गठीत किया। उसके बाद 9 अगस्त 1995 को देश मे पहली बार आदिवासी दिवस(Aadivasi divas) को मनाया गया था।

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