भस्त्रिका प्राणायाम के फायदे-Bhastrika pranayama benefits in hindi


भस्त्रिका प्राणायाम के फायदे | भस्त्रिका प्राणायाम की विधि Bhastrika pranayama benefits in hindi | Bhastrika pranayama steps in hindi


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दोस्तों आज हम इस लेख में Bhastrika pranayama ke fayde और Bhastrika pranayama kaise kare उसके बारेमें बात करेंगे। और इस प्राणायाम को करते वक्त कोनसी सावधानी रखनी चाहिए उसके बारेमें भी बात करेंगे।

भस्त्रिका प्राणायाम का भस्त्रिका शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है। भस्त्रिका का मतलब (अर्थ) "धौंकनी" होता है। इस प्राणायाम की क्रिया को अंग्रेजी में Bellows Breathing Technique भी कहा जाता है। जैसे लौहार अपने कारखाने में धौकनी की मदद से हवा के तेज झोको से लोहे को गर्म करके उसको आकार देने की और उसकी अशुद्धियाँ दूर करने की प्रक्रिया करता है। उसकी तरह ये भस्त्रिका प्राणायाम भी मन को साफ और शरीर के अंदर की नकारत्मकता हटाता है। इस प्राणायाम को धौंकनी की तरह प्रबल गति से अशुद्ध वायु को बहार निकाला जाता है और उसी गति से शुद्ध वायु को अंदर लिया जाया है। यहाँ देखे : कपालभाति प्राणायाम के फायदे और उसको करने की विधि 

वर्तमान सदी में वातावरण बहुत प्रदुषित होता जा रहा है और इसी प्रदूषित वातावरण के जरिये साँस लेने की प्रक्रिया से अशुद्ध हवा,धूल,मिटटी हमारे शरीर के अंदर दाखिल होते हे और हमारे फेफड़े को नुकसान पोहचाते है। इस नुकसान से बचने के लिए भस्त्रिका प्राणायाम एक श्रेष्ठ उपाय है।


    भस्त्रिका प्राणायाम कैसे करे - Bhastrika pranayama steps in hindi


    1. सर्व प्रथम शांत और अच्छी समतल जगह का चुनाव करे और वहाँ पे मैट या आसन बिछा ले।

    2. अब आप को व्रजासन,पद्मासन या सिद्धासन की स्थिति में बैठ जाना है। याद रहे यह प्राणायाम करते वक्त अपने शरीर को स्थिर रखना बहोत जरुरी है सिर या गर्दन बिलकुल हिलना नहीं चाहिए।

    3. अब आंखे बंद करे और अपने शरीर को स्थिर करके दोनों हांथो को ज्ञान मुद्रा में रखे।

    4. अब धौकनी की तरह नाक से तेज गति से सांस अंदर ले और बहार छोड़े। याद रखे जब सांस अंदर लेते हो तब फेफड़े फूलने चाहिए और सांस छोड़ते वक्त फेफड़ सिकुड़ने चाहिए। यह प्रक्रिया आपको 12 बार करनी है। इस प्राणायाम को करते वक्त सांस लेने का समय और सांस छोड़ने का समय एक समान होना चाहिए। यहाँ देखे : शीतली प्राणायाम करने की विधि 

    5. अब दोनों नथनों से धीमी गति से गहरी सांस ले और दोनों नथनों से धीमे धीमे सांस छोड़े और रिलेक्स हो जाये।

    6. शुरुआत में इस प्रक्रिया को 2 (2 मिनिट) बार दोहराएँ। अभ्यास बढ़ जाने के बाद आप इस प्रक्रिया को 5 से 10 बार दोहरा सकते है।

    7. इस प्रक्रिया को तीन अलग अलग गति से किया जाता है : 1 सेकंड में 2 सांस, 1 सेकंड में 1 सांस, 2.5 सेकंड में 1 सांस। आपको अनुरोध हे की आप शुरुआत में धीमी गति यानि की (2.5 सेकंड में 1 सांस)से करे।

    भस्त्रिका प्राणायाम के फायदे - Bhastrika pranayama benefits in hindi


    भस्त्रिका प्राणायाम के कुछ फायदे निचे दिए गए है

    1. वात, पित्त, कफ जैसी समस्या को दूर करने के लिए भस्त्रिका प्राणायाम राम बाण इलाज है।

    2. Bhastrika pranayama से फेफड़े मजबूत होते है।

    3. भस्त्रिका प्राणायाम के अभ्यास से कैंसर, टीबी, दमा और अन्य भयानक रोगो के मरीजों के स्वास्थय में काफी सुधार होता है। यहाँ देखे : भ्रामरी प्राणायाम करने की विधि और उसके फायदे 

    4. शरीर पर की चर्बी को काम करने में मददरूप बनता हे और शरीर का वजन कम करता है।

    5. मन और शरीर को स्फुर्तीला बनाता है।

    6. सांस लेने की प्रक्रिया तेज होने के कारन खून में ऑक्सीजन और कार्बन डायोक्साइड की हेर फेर जल्दी होती हे इसलिए चयापचय का दर बढ़ता है।

    7. भस्त्रिका प्राणायाम करने से ब्लड सर्क्युलेशन सिस्टम में सुधार आता है।

    8. भस्त्रिका प्राणायाम करने से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा हमेशा बनी रहती है।

    भस्त्रिका प्राणायाम की सावधानी -Bhastrika pranayama ki savdhani 


    1. भस्त्रिका प्राणायाम करने से पहले अपना नाक साफ करना चाहिए।

    2. यह प्राणायाम करने के बाद अनुलोम विलोम प्राणायाम करके श्वसन क्रिया को समान्य कर लेना चाहिए।

    3. हाय ब्लड प्रेसर और हदय की समस्या के मरीजों को भस्त्रिका प्राणायाम नहीं करना चाहिए। 

    4. पथरी के रोगी, हर्निया के रोगी, उच्च रक्तचाप के रोग, सायनस के रोगी को भस्त्रिका प्राणायाम नहीं करना चाहिए यह आपके लिए हानिकारक होता है। यहाँ देखे : उज्जायी प्राणायाम करने की विधि 

    5. अगर किसीको नाक की या पेट की समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही भस्त्रिका प्राणायाम करना चाहिए।

    6. यह प्राणायाम खाली पेट या फिर भोजन करने के 5 घंटे के बाद करना चाहिए।

    7. गर्मी की मौसम में यह प्राणायाम कम से कम करे और सुबह के समय ही करे।

    8. अगर आपको कोई बीमारी हे तो कोई भी प्राणायाम योग प्रशिक्षक या डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।

    भस्त्रिका प्राणायाम करने से पहले कोनसे आसन करने चाहिए -  Bhastrika pranayama(Bellows Breathing)karne se pehle konse aasan karne chahie


    रोजिंदा आप जो आसन करते हे उसको पूरा करने के बाद ही भस्त्रिका प्राणायाम करे।

    अगर आप इस प्राणायाम का ऊपर दी गई विधि अनुसार अभ्यास करते हे तो आपको ज्यादा लाभ प्राप्त होगा। इसलिए इस प्राणायाम को मन शांत करके विधि के अनुसार कीजिए।

    अगर आपको ये जानकारी अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर कीजिए।

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