उज्जायी प्राणायाम के फायदे और विधि-Ujjayi Pranayama ke fayde in Hindi

उज्जायी प्राणायाम के फायदे और विधि-Ujjayi Pranayama  in Hindi|Ujjayi Pranayama steps in Hindi|Ujjayi Pranayama benefits in Hindi

Ujjayi Pranayama ke fayde in Hindi
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दोस्तों आज हम इस लेख में Ujjayi Pranayama ke fayde और Ujjayi Pranayama steps बारेमें बात करेंगे।और अंत मे उज्जायी प्राणायाम करते वक्त कोनसी सावधानी रखनी चाहिए उसके बारेमें भी बताया गया है।

अगर आप सोच रहे हे की में मेरे शरीर और मन को कैसे शांत करू? तो उसके जवाब में आपको कहना चाहूंगा की आपको Ujjayi Pranayama(उज्जायी प्राणायाम) करना चाहिए। यह प्राणायाम करके आप अपने शरीर और मन को शांत कर सकते है। यह प्राणायाम प्राचीन योग श्वास तकनीक है। इस प्राणायाम के अभ्यास से अपने सांस को नियंत्रित किया जा सकता है। आठ प्राणायामों में चौथा महत्वपूर्ण प्राणायाम उज्जायी प्राणायाम है। यहाँ देखे : अनुलोम विलोम प्राणायाम कैसे करे और उसके फायदे


    उज्जायी प्राणायाम क्या है - what is Ujjayi pranayama 


    "उज्जायी" एक संस्कृत शब्द है जिसका मतलब "विजयी" या "जीतना" होता है।

    उज्जायी नाम संस्कृत के दो शब्द को जोड़कर बनाया गया है : "उद्" और "जी"। जिसका अर्थ होता हे : विजयी या जितने वाला।उज्जायी प्राणायाम को करके बहुत सारे रोगो से बचा जा सकता है। इस प्राणायाम को तीन प्रकार से किया जाता है खड़े होकर, बैठकर, लेटकर किया जाता है।

    उज्जायी प्राणायाम के फायदे - Ujjayi Pranayama benefits in Hindi


    उज्जायी प्राणायाम के फायदे आपको बताने जा रहा हूँ ध्यान से पढ़े :

    1. उज्जायी प्राणायाम करने से ध्यान केंद्रित करने की शक्ति बढ़ती है।

    2. उज्जायी प्राणायाम शांति प्रदान करने वाला प्राणायाम है इस प्राणायाम का उपयोग योग चिकित्सा में तांत्रिक तंत्र और मन को शांत करने के लिए किया जाता है। 

    3. यह प्राणायाम थॉयराइड की समस्या को दूर करता है और आवाज को मधुर बनाता है। यहाँ देखे : भ्रामरी प्राणायाम की विधि और लाभ

    4. यह प्राणायाम कोलेस्ट्रॉल को संतुलित करता है और दिल के दौरे के खतरें को कम करता है।

    5. यह प्राणायाम करने से शरीर की सारी बीमारी दूर होती हे और शरीर को स्वस्थ और मजबूत बनाता है।

    6. उज्जायी प्राणायाम साँस की बीमारी को दुर करने में बहुत मददगार है।

    7. यह प्राणायाम करने से रक्त, त्वचा, वीर्य, मज्जा, वसा, हड्डी, मांस के विकारों को हटता है।

    8. यह प्राणायाम गले के खर्राटे, टाँसिल, तुतलाहट के लिए बहोंत लाभकारी है।

    9. पुरानी बीमारियों को दुर करने में बहुत फायदेमंद है।

    उज्जायी प्राणायाम कैसे करे - Ujjayi Pranayama steps in hindi


    उज्जायी प्राणायाम करने की विधि इस प्रकार हे जिसे ध्यान से पढ़े:

    1. उज्जायी प्राणायाम करने की विधि बहोत ही आरामदायक और सरल है। सबसे पहले आंख बंध करके रीढ़ को सीधा करके पद्मासन या किसी भी ध्यान मुद्रा में बैठ जाये। यहाँ देखे : कपालभाति प्राणायाम की विधि और लाभ

    2. अब मुँह को बंद रखके नाक के माध्यम से कंठ-द्वार संकुचित करके जितनी हो सके उतनी साँस अपने अंदर भरे।

    3. साँस भरने के बाद जालंधर बंध या मूल बंध स्थिति में जितनी देर तक रोक सके उतनी देर तक अपने अंदर रोके।

    4. यथाशक्ति साँस रोकने के बाद नाक के दायें छिद्र को बंद करके नाक के बायें छिद्र से साँस को बहार छोड़े।

    5. ऊपर दी गई प्रक्रिया करने से एक चक्र पूरा होता है। इस चक्र को कई बार दोहराए।

    6. शुरू में इस प्राणायाम को आप पांच से आठ मिनिट तक करे जैसे जैसे इस प्राणायाम के अभ्यास करने का समय बीतता जाये बादमें आप इसे दस से बीस मिनिट तक करें।

    7. यह प्राणायाम करते वक्त आपको ज्यादा देर तक बैठने में तकलीफ होती हे तो आप इसे खड़े होकर या लेटकर भी कर सकते है।यहाँ देखे : शीतली प्राणायाम

    उज्जायी प्राणायाम कब करे 


    उज्जायी प्राणायाम शांति प्रदान करने वाला प्राणायाम है तो जब भी आप अपने आप को तनावग्रस्त महसूस करते हो तब यह उज्जायी प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए।

    उज्जायी प्राणायाम करने का उत्तम समय 


    उज्जायी प्राणायाम का अभ्यास आपको ध्यान करने से पहले सुबह या शाम के समय करना चाहिए।

    उज्जायी प्राणायाम करते वक्त क्या सावधानी रखनी चाहिए -Ujjayi pranayama me kya savdhani rakhni chahie 


    1. अगर आपको साँस संबंधी कोई बीमारी हे तो इस प्राणायाम को साँस रोके बिना करे।

    2. साँस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया नाक के माध्यम से ही करनी है मुँह का उपयोग न करें।

    3. इस प्रणायाम का अभ्यास खाली पेट ही करें।

    4. साँस की गति सामान्य रखें।


    योग शरीर और मन को शांत और शरीर का विकास करता है।योग के बहोत सारे शारीरिक और मानसिक फ़ायदे हैं लेकिन इसका उपयोग किसी दवा की जगह नही किया जाना चाहिए। यह जरुरी हे की कोई भी योगासन करते समय किसी योग प्रशिक्षक के निर्देशानुसार ही सीखें और करें।अगर आपको कोई शारीरिक दुविधा है तो योगासन करने से पहले अपने योग प्रशिक्षक या किसी भी डॉक्टर से अवश्य संपर्क करें।


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