एकबार इस विधि से कपालभाति प्राणायाम करने के फायदे देखो हिंदी में-Kapalbhati Pranayama Benefits in hindi

कपालभाति प्राणायाम करने के फायदे और उसकी विधि - Kapalbhati Pranayama Benefits and Steps in Hindi


Kapalbhati pranayama ke fayde
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दोस्तों आज हम इस लेख में कपालभाति प्राणायाम के फायदे और कपालभाति प्राणायाम कैसे करे उसके बारेमें बात करेंगे। और कपालभाति करते वक्त कोनसी सावधानी बरतनी चाहिए उसकी भी चर्चा विस्तार से करेंगे।

Meaning of Kapalbhati Pranayama -कपालभाति का अर्थ


कपालभाति एक संस्कृत शब्द हे जिसमें ‘कपाल’ का अर्थ 'खोपड़ी/माथा/ललाट' होता है और 'भाति' का अर्थ 'रौशनी(तेज़)' होता है। कपालभाति प्राणायाम के अभ्यास से सिर(मस्तक) तेज बनता है इसलिए इसे कपालभाति कहते हैं। Kapalbhati एक ऐसी सांस की प्रक्रिया है जिससे शरीर के कई प्रकार के रोग दूर होते हे और मस्तिष्क की क्रियाओं को नई चमक प्रदान करता है। और पुरे शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। अगर आप कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास रोज नियमित रूप से करते है तो आप जीवनभर निरोगी रह सकते हो।
Kapalbhati के अभ्यास को प्राणायाम और आसन से पहले करना चाहिए। कपालभाति प्राणायाम पुरे सिर को तेजी प्रदान करता है और यादशक्ति बढ़ाता है। इस प्राणायाम के अभ्यास से मस्तिका के निष्क्रिय पड़े भाग को जागृत करने में मदद करता है। कपालभाति प्राणायाम करते वक्त साँस लेने की प्रक्रिया जैसे धौंकनी चलती हे वैसी होती है। इस प्राणायाम में साँस को समान्य रूप से लिया जाता हे लेकिन उसको पुरे बल के साथ छोड़ा जाता है।

तो चलिए में आपको कपालभाति प्राणायाम के फायदे और उसको करने की विधि के बारेमें विस्तार से बताता हूँ।


    Kapalbhati Pranayama steps in hindi- कपालभाति प्राणायम करने की विधि

    कपालभाति प्राणायाम करने की विधि इस प्रकार है ध्यान से पढ़े:

    1. सबसे पहले किसी शांत जगह का चुनाव करे और चादर बिछा कर किसी भी ध्यान की मुद्रा में बैठें जाये। अपनी आंखे बंद रखे और पीठ को एकदम सीधा रखे। 

    2. अब सामान्य रूप से नाक द्वारा लम्बी गहरी साँस लें जिससे पेट फूल जाए और पेट की मासपेशियों को सिकोड़ते हुए पुरे बल के साथ सांस छोड़ दें। साँस छोड़ते वक्त अतिरिक़्त बल का प्रयोग न करे।

    3. अब जब आप बल के साथ साँस छोड़ते हो तो अगली बार सांस अपने आप ही खींच ली जाएगी और पेट की पेशियां भी अपने आप फैल जाएंगी। साँस लेते वक्त कोई भी प्रकार का बल का प्रयोग न करे।

    4. आपको सांस जैसे धौंकनी चलती हे ठीक वैसे चलानी है। और ध्यान रहे की आपको साँस को मुँह के जरिये नहीं तो लेने है और न ही छोड़ना है। यह क्रिया करते वक्त आपका पेट फूलना और सिकुड़ना चाहिए।

    5. इस प्रक्रिया को तेजी से दस से पंद्रह बार करने से एक चक्र पूरा होता हे।

    6. शुरुवाती दौर में इसे आप इस चक्र को तीन बार करें। धीरे धीरे अभ्यास बढ़ने के बाद इसे दस से पंद्रह बार करें।

    7. अगर आपके पास टाइम हे तो आप इस प्राणायाम को रुक रुक के ज्यादा समय तक कर सकते है।

    Kapalbhati Benefits in hindi - कपालभाति प्राणायाम के फायदे 


    Kapalbhati प्राणायाम के बहुत सारे फायदे है लेकिन यहां पर इसके कुछ महत्वपूर्ण फायदे के बारे में बताने जा रहा हूँ ध्यान से पढ़े :
    1. कपालभाति के अभ्यास को नियमित करने पर वजन घटता है और मोटापा कम होता है। इस प्राणायाम से नाड़ियों का शुद्धिकरण होता है।
    2. Kapalbhati pranayama बिमारियों को होने से रोकता है। और चयापचय की प्रक्रिया को बढ़ाता है और स्वस्थ करता है।

    3. यह प्राणायाम मधुमेह के रोगिओं के लिए अत्यंत मददगार होता है।

    4. यह मन को शांत करता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है।

    5. यह प्राणायाम करने से तनाव कम होता है और आँखों के आसपास काले धब्बे(डार्क सर्कल)को दूर करता है।

    6. कपालभाति के नियमित अभ्यास से बालों का जड़ना कम होता है।

    7. कपालभाति प्राणायाम फेफड़ों को मजबूत करता है। और फेफड़े की बीमारी को दूर करता है।

    8. यह पेट की मासपेशियों को मजबूत करता है।

    9. कपालभाति से कब्ज की समस्या काफी हद तक दूर होती है।

    10. चेहरे पे दमक बढ़ाता है। और चेहरे की सुंदरता बढ़ाता है।

    11. कपालभाति प्रणायाम करने से एसिडिटी और कृमि रोग दूर हो जाते है।

    12. कपालभाति प्राणायाम करने से नकारात्मक विचार नहीं आते और निर्णयशक्ति में बढ़ोतरी होती है।

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    कपालभाति प्राणायाम(Kapalbhati pranayama)की सावधानियां


    1. अगर आपको कमर दर्द की समस्या हे तो कपालभाति प्राणायाम नहीं करना चाहिए।                                                                                        
    2. साँस छोड़ते वक्त ज्यादा ताकत न लगाए।                                                               
    3. हृदय रोग, चक्कर की समस्या पीड़ित व्यक्तियों को यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए।                                                                                      
    4. गर्भवती महिलाओ को ये प्राणायाम डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।

    5. कपालभाति के अभ्यास के बाद शरीर को शांत करनेवाले योग या आसन करे।    

    6. कपालभाति प्राणायाम करने के बाद तुरंत भोजन न करें।

    7. पीलिया के रोगिओं को डॉक्टर की सलाह के बिना कपालभाति प्राणायाम नहीं करना चाहिए।

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